नियम 3 केवल आदर्शवादी नहीं है — यह प्रवर्तनीय कानूनी दायित्व है। न्यायालयों ने लगातार माना है कि इन दायित्वों का उल्लंघन प्रमुख दंड कार्यवाहियों का आधार बन सकता है।

नियम 3(1) — 21 दायित्व: क्या मतलब है हर एक का?

प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को हर समय निम्नलिखित 21 दायित्वों का पालन करना होगा:

#दायित्वव्यावहारिक अर्थ
(i)पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए रखेंकोई भ्रष्टाचार नहीं, बेईमानी नहीं, पद का दुरुपयोग नहीं
(ii)कर्तव्य के प्रति समर्पण बनाए रखेंसमय पर और अपेक्षित गुणवत्ता के साथ काम करें
(iii)सरकारी कर्मचारी की मर्यादा के विरुद्ध कुछ न करेंव्यक्तिगत आचरण में भी सेवा की गरिमा बनाए रखें
(iv)संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धतासंवैधानिक संस्थाओं का सम्मान; लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को न तोड़ें
(v)संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करेंराष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में न डालें
(vi)उच्च नैतिक मानक और ईमानदारी बनाए रखेंसभी सरकारी व्यवहार में सत्यनिष्ठा
(vii)राजनीतिक तटस्थता बनाए रखेंकिसी राजनीतिक दल का सार्वजनिक समर्थन या कार्य न करें
(viii)कर्तव्य पालन में योग्यता, निष्पक्षता और तटस्थतापक्षपात नहीं; निर्णय केवल गुणवत्ता के आधार पर
(ix)जवाबदेही और पारदर्शितानिर्णयों के बारे में खुले रहें; सरकारी कार्यों की व्याख्या करने में सक्षम
(x)जनता के प्रति, विशेष रूप से कमजोर वर्गों के प्रति उत्तरदायितावंचित और कमजोर लोगों को प्राथमिकता दें
(xi)जनता के साथ शिष्टाचार और अच्छा व्यवहारनागरिकों के साथ अहंकारी या अपमानजनक व्यवहार नहीं
(xii)केवल लोकहित में निर्णय; सार्वजनिक संसाधनों का कुशल उपयोगबेकार खर्च नहीं; निजी लाभ के लिए निर्णय नहीं
(xiii)सार्वजनिक कर्तव्यों से संबंधित निजी हितों की घोषणायदि किसी मामले में व्यक्तिगत हित हो — उसे प्रकट करें
(xiv)किसी व्यक्ति या संगठन से वित्तीय या अन्य दायित्व में न आएंऐसी स्थिति से बचें जहाँ कोई ऋण या एहसान निर्णय को प्रभावित करे
(xv)स्वयं, परिवार या मित्रों के लिए पद का दुरुपयोग न करेंअपना पद, पहुँच या अधिकार व्यक्तिगत समृद्धि के लिए न उपयोग करें
(xvi)केवल गुणवत्ता के आधार पर चुनाव और सिफारिशेंपदोन्नति, अनुबंध या लाभ की सिफारिशें केवल गुणवत्ता पर
(xvii)निष्पक्षता — विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के साथ भेदभाव न करेंस्थिति या संपर्क की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार
(xviii)कानून, नियम, विनियम और स्थापित प्रथाओं के विरुद्ध कुछ न करेंलिखित नियमों के साथ-साथ स्थापित प्रशासनिक परंपराओं का भी पालन करें
(xix)अनुशासन बनाए रखें; विधिसम्मत आदेशों का पालन करेंव्यक्तिगत असहमति होने पर भी विधिसम्मत आदेश मानें; उचित माध्यम से आपत्ति करें
(xx)कानून के अनुसार गोपनीयता बनाए रखेंवर्गीकृत या संवेदनशील जानकारी की रक्षा करें; लीक न करें
(xxi)उच्चतम व्यावसायिकता और समर्पण के साथ कर्तव्य पालनकेवल न्यूनतम नहीं — अपना सर्वश्रेष्ठ दें

नियम 3(2) — पर्यवेक्षी जिम्मेदारी और मौखिक आदेश

पर्यवेक्षी उत्तरदायित्व

पर्यवेक्षी पद पर बैठा हर सरकारी कर्मचारी यह सुनिश्चित करेगा कि उसके अधीन सभी कर्मचारियों में सत्यनिष्ठा और कर्तव्य के प्रति समर्पण बना रहे। पर्यवेक्षक अधीनस्थों के भ्रष्टाचार या लापरवाही से अनजान नहीं रह सकता — वह भी जिम्मेदार है।

मौखिक बनाम लिखित आदेश

नियम स्पष्ट है: अधीनस्थों को मौखिक आदेश जहाँ तक संभव हो, देने से बचना चाहिए। जहाँ अपरिहार्य हो — उच्चाधिकारी तुरंत उसे लिखित रूप में पुष्टि करेगा। अधीनस्थ को भी जल्द से जल्द लिखित पुष्टि माँगनी चाहिए। यह प्रावधान दोनों की रक्षा करता है — बाद में इनकार करने वाले भ्रष्टाचार से अधीनस्थ की रक्षा, और व्यवस्था को इनकार करने वाले भ्रष्टाचार से।

स्पष्टीकरण I — "कर्तव्य के प्रति समर्पण की कमी" का अर्थ

एक बार किसी काम को समय पर पूरा न करना — कर्तव्य के प्रति समर्पण की कमी नहीं है। यह आदतन विफलता है — काम न करने का पैटर्न। यह महत्वपूर्ण भेद है जब कोई कर्मचारी इस खंड के तहत आरोप का सामना कर रहा हो।

स्पष्टीकरण II — जिम्मेदारी से बचने का कोई रास्ता नहीं

कोई सरकारी कर्मचारी नियम 3(2) को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से बचने की ढाल नहीं बना सकता। जब अधिकार और जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से आपके पास हो — तब ऊपर से अनावश्यक अनुमोदन माँगना भी नियम की भावना का उल्लंघन है।

नियम 3 के सामान्य उल्लंघन

नियम 3(1)(i) का उल्लंघन — पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए न रखना — आमतौर पर CCS (CCA) नियम 1965 के तहत प्रमुख दंड कार्यवाहियों का आधार बनता है और बर्खास्तगी तक हो सकती है।

नियम 3 और अन्य आचरण नियमों का संबंध

नियम 3 अकेला नहीं है — यह बाकी नियमों के साथ मिलकर काम करता है:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. 1 — नियम 3 के तहत एक बार की गलती पर कार्यवाही हो सकती है?

अधिकांश उल्लंघनों के लिए पैटर्न देखा जाता है। लेकिन गंभीर उल्लंघन जैसे भ्रष्टाचार या गोपनीय जानकारी लीक करने पर एक बार की घटना भी कार्यवाही का आधार बन सकती है।

प्र. 2 — क्या पर्यवेक्षक को अधीनस्थ के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

हाँ। नियम 3(2) पर्यवेक्षकों को अपने अधीनस्थों में सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने का दायित्व देता है। जानबूझकर अनदेखी करना या ढील देना स्वयं एक उल्लंघन है।

प्र. 3 — मौखिक आदेश का पालन करें या नहीं?

विधिसम्मत मौखिक आदेश का पालन करें — लेकिन जल्द से जल्द लिखित पुष्टि माँगें। यदि आदेश अवैध हो — तो पालन करने की बाध्यता नहीं, और तुरंत ऊपर सूचित करें।