नियम 3A, 3B और 3C को 2014 में CCS (आचरण) नियम 1964 में जोड़ा गया — सर्वोच्च न्यायालय के Vishaka निर्णय (1997) और POSH अधिनियम 2013 के बाद। ये नियम मूल नियम 3 के पूरक हैं।
नियम 3A — कार्य में तत्परता
प्रत्येक सरकारी कर्मचारी यह सुनिश्चित करेगा कि उसके कार्यालय में कार्य समयबद्ध और कुशलतापूर्वक निपटाया जाए। इसमें विशेष रूप से शामिल हैं:
- नागरिकों के आवेदनों और शिकायतों का निर्धारित समयसीमा में निपटान।
- कार्यालय की फाइलों और पत्राचार का समयबद्ध निस्तारण।
- अधीनस्थों द्वारा प्रस्तुत फाइलों/नोटशीट पर अनावश्यक विलंब न करना।
नियम 3A का व्यावहारिक महत्व
फाइलों को जानबूझकर रोकना, अनुचित कारणों से निर्णय टालना, या नागरिकों के आवेदनों पर मासों तक कोई उत्तर न देना — ये सब नियम 3A के उल्लंघन हैं। यह नियम नागरिकों के लिए "सरकार से संपर्क का अधिकार" को प्रभावी बनाता है।
Citizens' Charter के साथ संबंध
प्रत्येक मंत्रालय/विभाग का Citizens' Charter एक निश्चित समयसीमा में सेवाएं देने का वचन है। नियम 3A इस Charter को कानूनी बल देता है — यदि कोई कर्मचारी बिना उचित कारण के सेवा में विलंब करे, यह नियम 3A का उल्लंघन है।
नियम 3B — शिष्टाचार और अच्छा व्यवहार
प्रत्येक सरकारी कर्मचारी जनता के साथ, विशेष रूप से उन लोगों के साथ जो उनसे सेवाएं लेने आते हैं — शिष्टाचारपूर्ण, सम्मानजनक और उचित व्यवहार करेगा।
नियम 3B में क्या शामिल है?
- नागरिकों के साथ अहंकारी, कठोर या अपमानजनक भाषा का उपयोग न करना।
- जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, भाषा के आधार पर भेदभाव न करना।
- विशेष रूप से — वंचित और कमजोर वर्गों के साथ संवेदनशीलता।
- टेलीफोन और ईमेल पर भी शिष्ट संवाद।
नियम 3B और नियम 3(1)(xi) का अंतर
नियम 3(1)(xi) में "जनता के साथ शिष्टाचार" का उल्लेख पहले से था — नियम 3B ने इसे एक अलग और विशिष्ट दायित्व बनाया, जिससे इसकी प्रवर्तनीयता मजबूत हुई।
नियम 3C — कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का पूर्ण निषेध
नियम 3C CCS (आचरण) नियम 1964 में सबसे महत्वपूर्ण 2014 संशोधनों में से एक है। यह POSH अधिनियम 2013 (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न — निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष अधिनियम) की भावना को आचरण नियमों में शामिल करता है।
नियम 3C — मुख्य प्रावधान
कोई भी सरकारी कर्मचारी कार्यस्थल पर किसी भी महिला के साथ यौन उत्पीड़न की किसी भी गतिविधि में लिप्त नहीं होगा। "यौन उत्पीड़न" में शामिल हैं:
- अवांछित शारीरिक संपर्क या स्पर्श।
- यौन-संबंधी टिप्पणियाँ, मज़ाक, या अश्लील संदेश।
- यौन अनुग्रह की माँग या अनुरोध।
- अश्लील साहित्य, चित्र या सामग्री दिखाना।
- कोई भी अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक, या गैर-मौखिक यौन प्रकृति का आचरण।
"कार्यस्थल" की विस्तृत परिभाषा
नियम 3C में "कार्यस्थल" केवल कार्यालय भवन तक सीमित नहीं:
- आधिकारिक दौरे के दौरान — होटल, परिवहन, प्रशिक्षण स्थल।
- आधिकारिक कार्यक्रम — बैठकें, सम्मेलन, कार्यशालाएं।
- सरकारी आवास परिसर — यदि कार्यालय से संबंधित संपर्क हो।
- वर्चुअल/ऑनलाइन माध्यम — ईमेल, WhatsApp, वीडियो कॉल पर भी।
नियम 3C और POSH अधिनियम 2013 — एक साथ
नियम 3C का उल्लंघन एक साथ दो कार्यवाहियाँ खोलता है:
| कार्यवाही का प्रकार | आधार | प्राधिकरण |
|---|---|---|
| अनुशासनात्मक कार्यवाही | CCS (आचरण) नियम 1964 नियम 3C + CCS (CCA) नियम 1965 | नियुक्ति/अनुशासनिक प्राधिकारी |
| ICC जाँच | POSH अधिनियम 2013 | आंतरिक शिकायत समिति (ICC) |
| आपराधिक मामला (यदि लागू) | भारतीय दंड संहिता / BNS | पुलिस/न्यायालय |
ICC — आंतरिक शिकायत समिति
POSH अधिनियम 2013 के तहत प्रत्येक सरकारी कार्यालय में ICC का गठन अनिवार्य है। ICC की संरचना:
- अध्यक्ष — वरिष्ठ महिला कर्मचारी।
- कम से कम दो सदस्य — कार्यालय के कर्मचारी।
- एक बाह्य सदस्य — NGO या महिला अधिकार क्षेत्र से।
ICC 90 दिन में जाँच पूरी करेगी और अनुशासनिक प्राधिकारी को रिपोर्ट देगी।
शिकायत प्रक्रिया — पीड़ित के लिए
- ICC को लिखित शिकायत — घटना के 3 माह के भीतर (ICC विस्तार दे सकती है)।
- ICC प्रारंभिक जाँच करेगी — सुलह/मध्यस्थता का प्रयास (यदि पीड़ित चाहे)।
- यदि सुलह न हो — औपचारिक जाँच।
- जाँच के दौरान — पीड़ित को विशेष अवकाश का अधिकार (POSH अवकाश — 90 दिन तक)।
- ICC रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकारी कार्रवाई।
झूठी शिकायत — नियम 3C में प्रावधान
यदि ICC पाए कि शिकायत झूठी या दुर्भावनापूर्ण थी — तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी कार्यवाही हो सकती है। लेकिन महत्वपूर्ण है: केवल साक्ष्य न मिलने से शिकायत "झूठी" नहीं मानी जाएगी — झूठी मंशा अलग से प्रमाणित होनी चाहिए।
पर्यवेक्षकों का विशेष दायित्व
नियम 3C के तहत पर्यवेक्षक (supervisor) का यह दायित्व है कि:
- अपने अधीन कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करे।
- शिकायत मिलने पर तुरंत ICC को सूचित करे — खुद जाँच न करे।
- शिकायतकर्ता या गवाहों के साथ कोई प्रतिकारात्मक व्यवहार न करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1 — ICC न होने पर शिकायत कहाँ करें?
यदि कार्यालय में ICC नहीं बनी है (जो स्वयं POSH अधिनियम का उल्लंघन है) — तो जिला स्तर पर Local Complaints Committee (LCC) में शिकायत की जा सकती है। साथ ही DoPT को शिकायत करें कि ICC नहीं बनाई गई।
प्र. 2 — क्या ईमेल या WhatsApp पर भेजे अश्लील संदेश नियम 3C का उल्लंघन हैं?
हाँ। "कार्यस्थल" में वर्चुअल माध्यम भी शामिल हैं। ऑनलाइन/डिजिटल यौन उत्पीड़न भी नियम 3C का उल्लंघन है।
प्र. 3 — क्या नियम 3C केवल महिलाओं की रक्षा करता है?
नियम 3C मुख्यतः महिलाओं की रक्षा के लिए है — POSH अधिनियम की तरह। लेकिन नियम 3(1)(xi) और सामान्य आचरण नियमों के तहत पुरुषों के विरुद्ध भी अशोभनीय आचरण अनुशासनात्मक कार्यवाही का विषय बन सकता है।
प्र. 4 — नियम 3A के तहत फाइल विलंब पर कार्यवाही कैसे होती है?
Citizens' Charter उल्लंघन पर CPGRAMS पर शिकायत, APAR में प्रतिकूल टिप्पणी, और गंभीर मामलों में CCS (CCA) नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही।